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8 अक्टूबर को भारत आएंगे ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर, पीएम मोदी के साथ इन मुद्दों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली। मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने भारत और ब्रिटेन के द्विपक्षीय आर्थिक व कारोबारी संबंधों में नया जोश भर दिया है। ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर की बुधवार (8 अक्टूबर) से शुरू हो रही दो दिवसीय दौरे में आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने पर काफी बातें होंगी।

इसके बावजूद जब पीएम नरेन्द्र मोदी ब्रिटिश पीएम के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे तो उसमें ब्रिटेन में खालिस्तान समर्थक संगठनों की गतिविधियों का मामला बहुत ही अहम होगा। भारत इस बात की उम्मीद कर रहा है कि हाल ही में हुए एफटीए से द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने की जो उम्मीद बनी है उसे खालिस्तान समर्थकों की वजह से हानि नहीं पहुंचाई जाएगी।

स्टार्मर का यह पहला भारत दौरा होगा

भारत अपनी इस बात को दोहराएगा कि खालिस्तान से जुड़ी गतिविधियों को राजनीतिक वजह से हवा देना ना सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को बल्कि ब्रिटेन को भी नुकसान पहुंचाने वाला साबित होगा। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि स्टार्मर का यह पहला भारत दौरा होगा जो जुलाई, 2025 में पीएम मोदी की लंदन यात्रा के बाद होने जा रहा है।

सिर्फ तीन महीनों के अंतराल पर दोनों देशों की सरकारों के प्रमुखों का एक दूसरे देश की यात्रा पर जाना यह बता रहा है कि द्विपक्षीय संबंधों को दोनों तरफ से प्राथमिकता दी जा रही है। अगर खालिस्तान समर्थकों को ब्रिटेन में होने वाली गतिविधियों को हटा दिया जाए तो दोनों देशों के संबंधों में कोई नकारात्मक मुद्दा नहीं है।

 

खालिस्तान समर्थकों पर लगेगी लगाम

ऐसे में भारत का तर्क है कि अगर इस मुद्दे पर भी ध्यान दिया जाए तो द्विपक्षीय संबंधों की गति और ज्यादा तेज हो सकती है। यही वजह है कि पीएम मोदी के ब्रिटेन दौरे के दौरान भी भारत ने इसे उठाते हुए कहा था कि, 'लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं का दुरुपयोग करने वाले चरमपंथियों' के खिलाफ कार्रवाई की अपील की थी।'

खालिस्तान समर्थक संगठन रह-रह कर ब्रिटेन और कनाडा में कई तरह की गतिविधियां करते हैं जिसे भारत अपने हितों के मुताबिक नहीं मानता। मार्च, 2025 में विदेश मंत्री एस जयशंकर जब लंदन दौरे पर थे तब खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने चेटम हाउस के बाहर सुरक्षा घेरा को तोड़ दिया था। विदेश मंत्री के वाहन पर हमला करने की कोशिश भी की गई थी। भारत ने इसकी कड़ी निंदा की थी।

 

ब्रिटेन में ऑपरेशन बेस बनाने का डर

जनवरी 2025 में फिल्म 'इमरजेंसी' के प्रदर्शन को खालिस्तानी समर्थकों ने बाधित किया था। इस पर कुछ ब्रिटिश सांसदों ने भी चिंता जताई थी। जुलाई 2025 में मोदी-स्टार्मर वार्ता में दोनों ने आतंकवाद की निंदा की थी और प्रत्यर्पण पर सहयोग का वादा किया था। हाल ही में कनाडा सरकार ने इस तरह के संकेत दिया है कि वह खालिस्तान समर्थक अतिवादी तत्वों पर सख्ती दिखाएगी।

 

ऐसे में भारतीय खुफिया एजेंसियों को डर है कि खालिस्तानी संगठन ब्रिटेन में नया ऑपरेशन बेस बना रहे हैं। भारत का मानना है कि ब्रिटेन में इनकी गतिविधियां अब केवल प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रह गईं, बल्कि वे ट्रांसनेशनल दमन और भारत के खिलाफ प्रचार में लिप्त हैं।