बिहार चुनाव और एनडीए का घोषणापत्र
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का रण जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए - NDA) ने अपना बहुप्रतीक्षित 'संकल्प पत्र' (घोषणापत्र) जारी कर दिया है। यह घोषणापत्र आगामी चुनाव में एनडीए का मुख्य एजेंडा और जनता से किए गए वादों का पुलिंदा है।
घोषणापत्र के मुख्य बिंदु: रोजगार, महिला और किसान केंद्र में
एनडीए के घोषणापत्र में मुख्य रूप से तीन वर्गों - युवा, महिला और किसान - को साधने का प्रयास किया गया है। प्रमुख वादे निम्नलिखित हैं:
1 करोड़ सरकारी नौकरियां: घोषणापत्र का सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी वादा 1 करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी देना है। एनडीए का दावा है कि सत्ता में वापसी पर इस लक्ष्य को अगले पांच वर्षों में हासिल किया जाएगा।
महिलाओं पर फोकस: महिला सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं प्रस्तावित हैं। इसमें महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण और स्वरोजगार के लिए विशेष ऋण योजनाओं का वादा शामिल है।
किसानों के लिए पैकेज: किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ, एनडीए ने कृषि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प लिया है।
बुनियादी ढांचा और विकास: बिहार में सड़कों, पुलों, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया है, ताकि राज्य के समग्र विकास को गति दी जा सके।
विपक्ष का हमला: "चुनावी जुमला"
एनडीए के इस 'संकल्प पत्र' पर विपक्षी दलों, विशेषकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और उसके नेता तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
तेजस्वी यादव ने एनडीए के वादों को "चुनावी जुमला" करार देते हुए कहा है कि, "जो लोग पिछले 15 वर्षों से सत्ता में हैं, वे अब फिर से सपने दिखा रहे हैं। 1 करोड़ नौकरियां कहां से आएंगी, इसका कोई रोडमैप नहीं है।" विपक्ष का तर्क है कि अगर एनडीए सरकार को रोजगार देना होता तो वह अब तक दे चुकी होती।