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टॉमहॉक मिसाइल सौदे पर रूस की कड़ी चेतावनी -कहा, यूक्रेन को मिसाइल मिलने से बढ़ेगा वैश्विक युद्ध का खतरा

मॉस्को/वॉशिंगटन, 11 अक्टूबर 2025 — रूस और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को चिंता में डाल दिया है। रूस ने यूक्रेन को अमेरिका से “टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल” (Tomahawk Cruise Missile) मिलने की संभावना पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और चेतावनी दी है कि यदि यह सौदा आगे बढ़ा, तो इससे युद्ध की स्थिति नाटकीय रूप से बढ़ सकती है

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एक बयान में कहा कि रूस इस रिपोर्ट से अत्यंत चिंतित है कि अमेरिका यूक्रेन को टॉमहॉक जैसी लंबी दूरी की और उच्च सटीकता वाली मिसाइलें देने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा —

“ऐसा कोई भी कदम सीधे तौर पर रूस की सुरक्षा के खिलाफ होगा। यदि यूक्रेन को इस प्रकार की घातक मिसाइलें मिलती हैं, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है और यह संघर्ष नए मोड़ पर पहुँच जाएगा।”

रूस ने यह भी दावा किया है कि टॉमहॉक मिसाइलें परमाणु वारहेड ले जाने की क्षमता रखती हैं, जिससे यह केवल रक्षात्मक नहीं बल्कि रणनीतिक हमले का साधन भी बन जाती हैं।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका प्रशासन यूक्रेन को किसी भी प्रकार की मिसाइल देने से पहले उसके “इरादों और उपयोग की सीमाओं” को स्पष्ट रूप से समझना चाहता है। ट्रंप ने कहा —

“हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई भी सैन्य सहायता केवल रक्षा के उद्देश्य से दी जाए, न कि युद्ध को बढ़ाने के लिए।”

अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने भी पुष्टि की है कि यूक्रेन की ओर से लंबी दूरी की मिसाइलों की मांग की गई है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।

टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल अमेरिका की सबसे उन्नत लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक हथियार प्रणाली है।

इसकी मारक क्षमता लगभग 1,500 किलोमीटर तक है।

यह जमीन या समुद्र से लॉन्च की जा सकती है।

इसे सामान्य या परमाणु वारहेड दोनों से लैस किया जा सकता है।

रूस को डर है कि यदि यूक्रेन को यह मिसाइलें मिलती हैं, तो वह इनका इस्तेमाल क्राइमिया, बेलगोरोद या बेलारूस सीमा के पास स्थित रूसी ठिकानों पर हमले के लिए कर सकता है।

2022 से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध अब तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। हाल के महीनों में यूक्रेन को अमेरिका और नाटो देशों से आधुनिक टैंकों, ड्रोन और मिसाइल सिस्टम की सहायता मिली है, जिससे उसने अपने बचाव को मजबूत किया है।

लेकिन रूस का कहना है कि पश्चिमी देशों की यह लगातार सैन्य सहायता वास्तव में “युद्ध भड़काने की रणनीति” है, न कि शांति की दिशा में कोई कदम।

रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यदि अमेरिका यह मिसाइलें देता है, तो रूस इसके “सैन्य और तकनीकी परिणामों” की जिम्मेदारी अमेरिका पर डालेगा।

यूरोपीय संघ के कई देशों ने इस मुद्दे पर संयम बरतने की अपील की है। जर्मनी और फ्रांस ने कहा है कि यूक्रेन को दी जाने वाली किसी भी सैन्य सहायता को “संतुलित और पारदर्शी” होना चाहिए, ताकि संघर्ष का दायरा न बढ़े।

वहीं, चीन ने भी अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि “किसी भी संघर्ष में हथियार आपूर्ति कभी समाधान नहीं हो सकती।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टॉमहॉक मिसाइल सौदा आगे बढ़ा, तो इससे रूस और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं। इस स्थिति में शांति वार्ता की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक डॉ. अलेक्सेई वोरोंसकी कहते हैं —

“यह केवल रूस-यूक्रेन युद्ध नहीं रहेगा, बल्कि नाटो और रूस के बीच एक प्रत्यक्ष टकराव में बदल सकता है। इसका असर पूरी दुनिया की सुरक्षा पर पड़ेगा।”