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प्लेन मोरन हाईवे पर उतरा: असम में पीएम मोदी का शक्ति प्रदर्शन, चीन सीमा से 300 किमी दूर दिखी भारत की रणनीतिक तैयारी

प्लेन मोरन हाईवे पर उतरा: असम में पीएम मोदी का शक्ति प्रदर्शन, चीन सीमा से 300 किमी दूर दिखी भारत की रणनीतिक तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के असम दौरे ने देश की सामरिक और बुनियादी ढांचे की ताकत को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया। इस दौरे का सबसे खास पहलू रहा कि प्रधानमंत्री का विमान डिब्रूगढ़ के पास प्लेन मोरन हाईवे पर बनी विशेष एयरस्ट्रिप पर उतरा। यह एयरस्ट्रिप चीन सीमा से लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित है और आपात स्थिति में वायुसेना के लड़ाकू विमानों के संचालन के लिए पूरी तरह सक्षम है। प्रधानमंत्री की इस लैंडिंग को रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

प्लेन मोरन हाईवे को हाल के वर्षों में इस तरह विकसित किया गया है कि जरूरत पड़ने पर यह रनवे की तरह काम कर सके। प्रधानमंत्री के विमान की सफल लैंडिंग ने यह साबित कर दिया कि भारत अब सीमावर्ती इलाकों में भी आधुनिक और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर चुका है। यह न सिर्फ नागरिक उपयोग के लिए अहम है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस ऐतिहासिक मौके पर भारतीय वायुसेना की ताकत भी खुलकर सामने आई। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस ने आसमान में उड़ान भरकर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इन विमानों की गर्जना ने यह साफ संकेत दिया कि भारत अपनी हवाई सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क और सक्षम है। खास तौर पर राफेल और तेजस की मौजूदगी ने आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूती दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान पूर्वोत्तर राज्यों के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि असम और पूरा नॉर्थ ईस्ट अब देश के विकास का नया इंजन बन रहा है। सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार से यह क्षेत्र न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहा है। प्लेन मोरन जैसे हाईवे एयरस्ट्रिप इसी सोच का परिणाम हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन सीमा के पास इस तरह की सुविधाएं भारत की रणनीतिक बढ़त को दर्शाती हैं। किसी भी आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदा के समय इन एयरस्ट्रिप्स का इस्तेमाल तेजी से राहत और सैन्य अभियान के लिए किया जा सकता है। इससे सेना की त्वरित तैनाती और आपूर्ति सुनिश्चित होती है।

प्रधानमंत्री का यह दौरा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे के विकास और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को लेकर पूरी तरह गंभीर है। असम की धरती से उठी यह तस्वीरें और संदेश न केवल देशवासियों का भरोसा बढ़ाती हैं, बल्कि दुनिया को भी भारत की बढ़ती ताकत का एहसास कराती हैं।

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