राष्ट्रभक्ति को नई दिशा: सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के बाद 6 छंदों वाला ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य”
सरकार ने देशभर में आयोजित होने वाले सभी सरकारी कार्यक्रमों के लिए एक नई और महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है। इस दिशा-निर्देश के अनुसार अब प्रत्येक सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्रगान के तुरंत बाद छह छंदों वाला ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य रूप से गाया जाएगा। इस निर्णय को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक चेतना और देशभक्ति की भावना को और अधिक सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
‘वंदे मातरम्’ भारत का एक ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखने वाला गीत है, जिसकी रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है और मातृभूमि के प्रति समर्पण व सम्मान की भावना को अभिव्यक्त करता है। सरकार का मानना है कि राष्ट्रगान के साथ ‘वंदे मातरम्’ के छह छंदों का सामूहिक गायन नागरिकों, विशेषकर युवाओं, में देश के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत करेगा।
जारी की गई गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था केंद्र और राज्य सरकारों के सभी आधिकारिक कार्यक्रमों, समारोहों, उद्घाटनों और विशेष आयोजनों में लागू होगी। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से की जाएगी और उसके तुरंत बाद ‘वंदे मातरम्’ के निर्धारित छह छंदों का गायन होगा। इसके लिए संबंधित विभागों और आयोजकों को पहले से तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य किसी पर कोई दबाव बनाना नहीं, बल्कि देश की साझा सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देना है। गाइडलाइन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सभी नागरिकों की भावनाओं और संवैधानिक मूल्यों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। कार्यक्रमों में अनुशासन, गरिमा और सम्मानपूर्ण वातावरण बनाए रखना आयोजकों की जिम्मेदारी होगी।
इस निर्णय पर विभिन्न वर्गों से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोगों ने इसे सराहनीय कदम बताते हुए कहा है कि इससे राष्ट्रीय चेतना को बल मिलेगा और नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों से जोड़ने में मदद मिलेगी। वहीं कुछ लोगों ने इसके व्यावहारिक पक्षों पर चर्चा की आवश्यकता जताई है, ताकि सभी स्थानों और परिस्थितियों में इसका सुचारु रूप से पालन हो सके।
कुल मिलाकर, सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के बाद छह छंदों वाला ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य करने का यह निर्णय देशभक्ति, एकता और सांस्कृतिक सम्मान को केंद्र में रखता है। यदि इसे संवेदनशीलता और समन्वय के साथ लागू किया गया, तो यह पहल निस्संदेह राष्ट्रीय भावना को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।