गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ बना भारत की सैन्य शक्ति का मंच: ध्रुव हेलिकॉप्टर की गर्जना, भीष्म-अर्जुन टैंकों की गूंज और भैरव बटालियन की हुंकार
गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ एक बार फिर भारत की सैन्य शक्ति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और अनुशासित पराक्रम का सजीव प्रदर्शन बना। पूरे देश और दुनिया की निगाहें उस पल पर टिकी थीं, जब भारतीय सशस्त्र बलों ने अपने अत्याधुनिक हथियारों, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों और प्रशिक्षित जवानों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। इस भव्य परेड में 27 से अधिक झलकियों (फोटो) के माध्यम से भारत की सैन्य तैयारियों और रणनीतिक क्षमता की झांकी देखने को मिली।
कर्तव्य पथ पर सुबह जैसे ही परेड की शुरुआत हुई, वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया। तीनों सेनाओं – थलसेना, नौसेना और वायुसेना – के संयुक्त मार्च और सुसंगठित प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि भारत न केवल शांति का पक्षधर है, बल्कि अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम भी है।
सबसे पहले ध्यान खींचा भारतीय वायुसेना के स्वदेशी हेलिकॉप्टर ध्रुव ने। आकाश में उड़ते हुए ध्रुव हेलिकॉप्टर ने अपनी फुर्ती, मारक क्षमता और तकनीकी मजबूती का प्रदर्शन किया। यह हेलिकॉप्टर न केवल सैन्य अभियानों में बल्कि आपदा राहत, खोज और बचाव कार्यों में भी अहम भूमिका निभाता है। ध्रुव का यह प्रदर्शन ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की रक्षा क्षेत्र में सफलता का प्रतीक माना गया।
इसके बाद कर्तव्य पथ पर गूंज सुनाई दी भारतीय थलसेना के अत्याधुनिक टैंकों की। भीष्म टैंक, जिसे टी-90 का भारतीय संस्करण कहा जाता है, ने अपनी ताकत और गतिशीलता से दर्शकों को प्रभावित किया। यह टैंक रेगिस्तानी इलाकों से लेकर कठिन परिस्थितियों में भी दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। इसके साथ ही स्वदेशी तकनीक से सुसज्जित अर्जुन टैंक ने भी परेड में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अर्जुन टैंक की भारी मारक क्षमता, उन्नत फायर कंट्रोल सिस्टम और मजबूत सुरक्षा कवच भारत की रक्षा तकनीक में हुए निरंतर सुधार को दर्शाते हैं।
कर्तव्य पथ पर जब भैरव बटालियन के जवानों की टुकड़ी आगे बढ़ी, तो उनकी हुंकार और अनुशासित कदमों ने पूरे माहौल को जोश से भर दिया। विशेष प्रशिक्षण प्राप्त इन जवानों का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण था कि भारतीय सेना केवल हथियारों के बल पर नहीं, बल्कि अपने सैनिकों के अदम्य साहस और मानसिक मजबूती के दम पर भी मजबूत है। उनकी एक-एक चाल, एक-एक कदम वर्षों की कठोर ट्रेनिंग और समर्पण की कहानी कह रहा था।
इस वर्ष की परेड में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण पर विशेष जोर दिया गया। मिसाइल प्रणालियों, निगरानी उपकरणों और आधुनिक संचार तकनीकों की झलक ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी निर्भरता को लगातार कम कर रहा है। परेड में प्रदर्शित कई प्रणालियां भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत का परिणाम हैं, जो देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर हैं।
परेड के दौरान वायुसेना के फ्लाई-पास्ट ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया। लड़ाकू विमानों की गर्जना और सटीक उड़ान ने यह दिखाया कि भारत का आकाश पूरी तरह सुरक्षित हाथों में है। आकाश में तिरंगे के रंगों का निर्माण करते विमानों ने देशभक्ति की भावना को और प्रबल किया।
कर्तव्य पथ पर मौजूद हजारों दर्शकों के साथ-साथ टेलीविजन और डिजिटल माध्यमों से करोड़ों लोगों ने इस शक्ति प्रदर्शन को देखा। 27 तस्वीरों में कैद ये पल केवल एक परेड नहीं, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय एकता का जीवंत दस्तावेज बन गए।
गणतंत्र दिवस की यह परेड एक संदेश भी थी – कि भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगा। ध्रुव हेलिकॉप्टर का प्रहार, भीष्म-अर्जुन टैंकों की धमक और भैरव बटालियन की हुंकार ने दुनिया को साफ संकेत दिया कि भारत हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
अंततः, कर्तव्य पथ पर हुआ यह शक्ति प्रदर्शन केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मा, उसके अनुशासन, उसके वैज्ञानिक कौशल और उसके जवानों के अदम्य साहस का उत्सव था। गणतंत्र दिवस 2026 की यह परेड लंबे समय तक लोगों के मन में देशभक्ति और गर्व की भावना को जीवित रखेगी।