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बिहार बनेगा नया औद्योगिक हब? स्टील प्लांट और इलेक्ट्रॉनिक सिटी के लिए निवेश का ब्लूप्रिंट सामने

पटना: बिहार की औद्योगिक तस्वीर जल्द ही बदलती नज़र आ सकती है। राज्य सरकार ने स्टील प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक सिटी और सहायक औद्योगिक इकाइयों को लेकर एक महत्वाकांक्षी निवेश ब्लूप्रिंट तैयार किया है, जिससे बिहार को पूर्वी भारत के नए औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह ब्लूप्रिंट भारी उद्योग, आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स को एकीकृत ढांचे में जोड़ने पर केंद्रित है। प्रस्तावित योजना के तहत राज्य के चुनिंदा औद्योगिक क्लस्टरों में आधुनिक स्टील प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC) और स्टार्टअप-फ्रेंडली इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा।

स्टील सेक्टर से खुलेगा रोजगार का द्वार

योजना के मुताबिक, बिहार में प्रस्तावित स्टील प्लांट न केवल निर्माण और बुनियादी ढांचे को मजबूती देंगे, बल्कि हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा करेंगे। स्थानीय स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता और बेहतर रेल-रोड कनेक्टिविटी को इसका प्रमुख आधार बताया जा रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक सिटी से आईटी निवेश को बढ़ावा

इलेक्ट्रॉनिक सिटी परियोजना के तहत सेमीकंडक्टर असेंबली, मोबाइल कंपोनेंट, ईवी इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सर्विसेज से जुड़ी कंपनियों को आकर्षित करने की तैयारी है। सरकार टैक्स इंसेंटिव, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और स्किल डेवलपमेंट सपोर्ट देने पर भी विचार कर रही है।

निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल

राज्य सरकार का दावा है कि नई औद्योगिक नीति के जरिए भूमि आवंटन, बिजली, पानी और लॉजिस्टिक्स जैसी बुनियादी सुविधाओं को आसान बनाया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें उद्योगों से जोड़ने की योजना भी शामिल है।

क्या बदलेगी बिहार की औद्योगिक पहचान?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ब्लूप्रिंट ज़मीन पर प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो बिहार की पहचान केवल कृषि आधारित राज्य तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब के रूप में भी उभर सकता है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह निवेश ब्लूप्रिंट कितनी तेजी से अमल में आता है और क्या बिहार सच में औद्योगिक विकास की नई कहानी लिख पाता है।